डॉ॰ सूर्या बाली "सूरज"

यकीं मुझको है तुम आओगे इक दिन

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क्षय रोग (टीबी)

रोग है टीबी संक्रामक, क्षयरोग तपेदिक इसके नाम।

फैलाता जीवाणु इसे माइक्रोबैक्टेरियम जिसका नाम ॥

यह बीमारी मुख्य रूप से फेफड़ों को खा जाती है।

हड्डी, चमड़ी, जोड़ों आंतों को भी ग्रास बनाती है॥

खाँसी छींक से थूक की बूंदे जो रोगी से आती हैं।

अच्छे भले इंसां को भी टीबी का रोग दिलाती हैं॥

भीड़ भाड़, गंदगी, गरीबी और कुपोषण जहां रहेगा।

वहीं पे टीबी ज़्यादा होगी घुट घुट के इंसान मरेगा॥  

चलो बचाएं सबको इससे कर दें इसका कत्ले आम।

रोग है टीबी संक्रामक, क्षयरोग तपेदिक इसके नाम॥1॥

भारत जैसे देशों की टीबी विकराल समस्या है।

इससे बचना और बचाना अब तो एक तपस्या है॥

एड्स के आ जाने से टीबी की औक़ात बढ़ी है।

साथ है चोली दामन का दोनों में खूब छनी है॥

चार व्यक्ति भारत मे प्रति मिनट संक्रमित होते है।

रुग्णावस्था में जा करके अपना जीवन खोते हैं॥

एक मिनट में एक व्यक्ति का कर देती है काम तमाम।

रोग है टीबी संक्रामक, क्षयरोग तपेदिक इसके नाम॥12॥

लाइलाज़ ये रोग नहीं इससे बिलकुल न घबराएँ।

लक्षण इसके दिखते ही फ़ौरन डाक्टर को दिखलाएँ॥

तीन हफ़्ते से ज़्यादा यदि रोगी को खाँसी आती है।

लगातार हल्का बुख़ार हो और भूंख मर जाती है॥

बलगम में जब दिखे खून और सीने में दर्द सताए॥

वज़न घटे  जब लगातार टीबी  के लक्षण बतलाए।

जांच करा लें  बलगम की वरना बुरा होगा अंजाम ।

रोग है टीबी संक्रामक, क्षयरोग तपेदिक इसके नाम॥3॥

राष्ट्रीय क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम को सफल बनाएँ।

स्वास्थ्य केंद्र पे जा करके टीबी का उपचार कराएँ॥

इन केन्द्रों पे क्षय रोगी की मुफ्त जांच की जाती है।

रोग अगर होता है तो टीबी की दवा दी जाती है॥

लगातार जब पूर्ण अवधि तक ए.टी.टी. को खाएँगे।

                            टीबी से मुक्ति पा करके जीवन स्वस्थ बनायेंगे॥

मुक्ति मिलेगी टीबी से तो तन मन को होगा आराम ॥

रोग है टीबी संक्रामक, क्षयरोग तपेदिक इसके नाम॥

इधर उधर न थूंके केवल थूकदान प्रयोग मे लाएँ।

ध्यान रहे की थूकदान में ब्लीचिंग पाउडर अवश्य मिलाएँ॥

अगर छींक खाँसी आए तो मुंह पर इक रूमाल लगाएँ।

टीबी का उपचार कराके स्वयं  बचें औरों को बचाएँ।

सही समय पे अगर आप उपचार नहीं करवायेंगे।

पक्का है क्षय रोग के द्वारा इक दिन मारे जाएंगे॥

टीबी है घातक बीमारी बचना इससे सुबहो-शाम।

रोग है टीबी संक्रामक, क्षयरोग तपेदिक इसके नाम॥4॥

बीसीजी का एक टीका क्षय रोग से बहुत बचाता है।

तुरंत जन्म के बाद या 6 हफ़्ते में लगाया जाता है॥

स्वास्थ्य केंद्रों पे जाकर के मुफ्त में ये टीका लगवाएँ।

क्षय रोग से भारत की भावी पीढ़ी को आप बचाएं॥

मिलजुल के 24 मार्च को विश्व क्षय रोग दिवस मनाएँ।

टीबी के नियंत्रण में भारत सरकार का हाथ बटाएँ॥

जनहित, देश-समाज के हित में मिलकर आओ करें ये काम।

रोग है टीबी संक्रामक, क्षयरोग तपेदिक इसके नाम॥5॥

                                                  डॉ. सूर्या बाली “सूरज”

 

परिवार नियोजन और शादी की सही उम्र

शादी से शुरुआत है होती, एक नए परिवार की।

रचना करते मिलकर दो दिल, एक नए संसार की॥

सही उम्र मे लड़का-लड़की यदि करते विवाह हैं।

तब शादी सुखमय जीवन, उज्ज्वल भविष्य की राह है॥

लड़की की शादी तब करना, जब हो अठरह साल की।

इससे पहले राह न पकड़े, वो अपने ससुराल की॥

सही उम्र लड़के की शादी की, इक्कीस के बाद है।

इससे पहले शादी करना, क़ानूनन अपराध है॥

सही उम्र मे शादी से, फ़ायदा होता हर बात का।

अवसर मिलता शारीरिक एवं मानसिक विकास का॥

पढ़ लिखके आत्म निर्भर हो, समझे अपने अधिकार को।

छोड़े रूढ़िवादी रस्मों को, अपनाएं नए विचार को॥

शादी के उपरांत रखेँ, सीमित अपने परिवार को।

वैवाहिक जीवन का मज़ा लें, जाने इस संसार को॥

गर्भ निरोधक अपना के, बच्चा टालें कुछ साल तक।

समय रहते यदि न चेते तो, पछतायेंगे सौ साल तक॥

माँ बनने की सही उम्र भी बीस साल के बाद हो।

जिससे जीवन सुखमय हो जच्चा बच्चा आबाद हों॥

बच्चे की तब सोचें, जब पति पत्नी जिम्मेदार हों।

शिशु के लालन पालन को, दोनों ही तैयार हों॥

दो बच्चों के बीच फ़ासला, कम से कम तीन साल हो।

जिससे शिशु और माँ, दोनों ही खुशहाल हों॥

एक ही या दो बच्चे सोचें, अपनाएँ परिवार नियोजन को।

जिससे बच्चों को दे पाये,अच्छे कपड़े, घर, भोजन को॥

बढ़ती जनसंख्या को रोकें, बचाएं हिंदुस्तान को।

रोटी, कपड़ा, मकां मिल सके, जिससे हर इंसान को॥

सही उम्र मे शादी करके, अपना फ़र्ज़ निभाएँ आप।

औरों को भी शादी की, सही उम्र बतलाएँ आप॥

                                                              डॉ॰ सूर्या बाली “सूरज”

विश्व एड्स दिवस पर विशेष कविता

रोग तो अनेक प्रकार के हैं मानव में,

उनमे से एड्स की समस्या विकराल है।

सुलझी न गुत्थी इस रोग के इलाज़ की,

डॉक्टर और वैद्य सब इससे बेहाल हैं।।

                                   एक्वायर्ड इम्मुनो डिफीसियंसी सिंड्रोम नाम,

                                   आरएनए विषाणुजनित रोग की मिशाल है।

                                    एचआईवी विषाणु पैदा करता है एड्स को,

                                    रोक सके कौन इसे किसकी मजाल है।।

दूध, लार, मेरुद्रव्य में निवास करता है,

रक्त, वीर्य, योनिरस में तो मालामाल है।

करे मित्रता ये  सीडी-4 रक्त कणिका से,

पंगु प्रतिरक्षा करे ऐसी इसकी चाल है।।

                                  जब घट जाए प्रतिरोधक शक्ति तन की तो,

                                  कोई भी रोग कर सके बुरा हाल है।

                                  कहने को हमने तो चांद को भी जीत लिया,

                                  खोजे कैसे एड्स का इलाज़ ये सवाल है?

स्त्री, पुरुष, वर्ग, जाति-धर्म कोई हो,

करता न भेद भाव यही तो कमाल है।

सभी सूई, वैक्सीन, टबलेट बेकार हुए,

कोई भी दावा न तोड़ सकी इसका जाल है।।

                                 जांच करवा के ही खून चढ़वाइएगा,

                                 लगे नई सुई सिरिंज रखना ख्याल है।

                                 किसी अंजाने से संबंध जो बनाइये तो,

                                 उम्दा निरोध का ही करना इस्तेमाल है।।

रोग लाईलाज न तो टीका न दवाई है,

करिए बचाव एकमात्र यही ढाल है।

रोग लाईलाज न तो टीका न दवाई है,

करिए बचाव एकमात्र यही ढाल है।।

                                                               डॉ॰ सूर्या बाली “सूरज”

विश्व एड्स दिवस पर विशेष कविता भाग-2

रोग तो अनेक प्रकार के हैं मानव में, उनमे से एड्स की समस्या विकराल है।

रोग लाईलाज न तो टीका न दवाई है, करिए बचाव एकमात्र यही ढाल है।।

असुरक्षित यौन संबंध के बनाने से,

संक्रमित ख़ून को शरीर मे चढ़ाने से,

नशे की सुई एक दूजे लगाने से,

संक्रमित माँ से नवजात शिशु मे, इस तरह एड्स फैलता मायाजाल है।

हाथ मिलाने से और साथ खाना खाने से,

छूने से या चुंबन से या गले लग जाने से,

काटने से मच्छर के और आम जगह जाने से,

साथ उठने बैठने या बोलने बतलाने से, फैलता नहीं एड्स यही इसका कमाल है।

विश्वव्यापी ए बीमारी, इससे बचो नर-नारी,

एड्स का प्रसार रोको सबकी है ज़िम्मेदारी,

बनोगे जो व्यभिचारी,मुफ़्त मिलेगी बीमारी,

घुट घुट के मारना होगा मस्ती पड़ेगी भरी, तब मत कहना की मेरा बुरा हाल है।

तेजी से चढ़े बुख़ार, आता रहे बार-बार,

बढ़ जाएँ गिल्टियाँ, वज़न घटे लगातार,

छोटे मोटे रोग भी जमाने लगे अधिकार,

दो-तीन महीने तक जब दस्त हो बार, तो समझो की एड्स का आनेवाला भूचाल है।

रोगी को प्यार दें, तिरस्कार मत करें,

घर से समाज से बहिष्कार मत करें,

घृणा से न देखे उसे, शब्दवार मत करें,

बची खुची ज़िंदगी तो चैन से बिताने दें, अंत मे बेचारे को समाना काल गाल है।

सुई लगा के नशे की मस्त घूम रहा,

होके मदांध, वेश्याओं के पांव चूम रहा,

साथ मे विकराल एड्स रोग लिए घूम रहा,

भटका है युवा , होगा उस देश का क्या? देश रूपी नैया के खेवैया का जब ये हाल है।

यदि घर का मुखिया, कमाने वाला ग्रस्त होगा,

पति और पत्नी का जीवन सूर्य अस्त होगा,

पूरा परिवार एक की ग़लती से त्रस्त होगा,

होगा क्या भविष्य, जाएँगे अनाथ बच्चे कहाँ? “सूरज” का पूरी दुनिया से ये सवाल है।

            डॉ॰ सूर्या बाली “सूरज”

कापर-टी :एक गर्भ निरोधक साधन

कापर-टी एक अस्थायी गर्भ निरोधक साधन है।

अवांछित गर्भ रोकना, इसका मात्र प्रयोजन है॥

तीन साल का अंतराल यदि बच्चों मे रखना चाहें।

मुफ़्त मे, स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर कापर-टी लगवा लें॥


अंतराल यदि बच्चों मे रखेगें तो बेहतर होगा॥

अच्छी शिक्षा और स्वास्थ्य उनके लिए हितकर होगा॥

बच्चेदानी  के भीतर यदि कापर-टी लगा दी जाती है।

जब बच्चे की चाहत हो, आसानी से हटा दी जाती है॥


डिंब और शुक्राणु को ये मिलने से रोक देती है।

एक भरोसे मंद उपाय जो बहुत सुरक्षा देती है॥

प्रशव के छः हफ़्ते बाद, या गर्भ समापन जब करवाएँ।

या मासिक धर्म के तुरंत बाद मे कापर-टी लगवाएँ॥


कुछ महिलाओं को कापर-टी थोड़ा कष्ट दे सकती है।

अधिक माहवारी या पेंड़ू मे पीड़ा कर सकती है॥

कुछ ही दिन मे ये दिक्कत स्वतः दूर हो जाती है।

डॉक्टर से संपर्क करें यदि दिक्कत ज़्यादा आती है॥


पहला बच्चा होने के बाद ही कापर-टी लगवाएँ॥

तीन साल तक मस्त रहे और गर्भ से छुट्टी पाएँ॥

साफ हाथ से बीच बीच मे धागे का अनुभव किया करें॥

संक्रामण न होने पाये इस बात का ध्यान भी दिया करें॥


योनि मे कोई संक्रामण हो या अनियमित माहवारी हो।

पेट मे बच्चा पलटा हो या एनीमिया की बीमारी हो॥

बच्चे दानी मे यदि सूजन, कैंसर, ट्यूमर हो जाएँ ।

ऐसी स्थितियों मे कभी भी कापर-टी न लगवाएँ॥


कापर-टी विश्वसनीय तरीक़ा, हँसी ख़ुशी अपनाएं।

वैवाहिक जीवन का सुख ले, अनचाहे गर्भ से छुट्टी पाएँ॥

बातें “सूरज” की मानें, बस दो ही फूल खिलाएँ ॥

बढ़ती जनसंख्या को कम करें, कापर-टी लगवाएँ॥


                                                     -डॉ॰ सूर्या बाली “सूरज”

स्वच्छता संबंधी नारे एवं स्लोगन

दिन प्रतिदिन की स्वच्छता कितनी है अनमोल।

                      सुख, समृद्ध, विकास की देती रहें खोल ।।

                                  अगर स्वच्छता पास रही तो रोग नहीं आएंगे।

                                               तन निरोग, सुंदर होगा,जीवन खुशहाल बनाएँगे॥


साफ सफाई को यदि हम जीवन में अपनाएँगे।

                       कितना बड़ा बना देती है तभी समझ हम पाएंगे॥

                                              वस्त्रों को रखें सदा स्वच्छ और रोज़ नहाएँ।

                                                           हाथों पैरों के कोई नाखून नहीं बढ्ने पाये॥


रोज़ शौच के बाद हाथ साबुन से धोएँ।

                          खाना खाने के उपरांत, ब्रश करके सोएँ॥

                                       थोड़ी सी यह साफ सफाई ज़्यादा काम करेगी।

                                                         बचत करेगी पैसे की, डॉक्टर से दूर रखेगी॥


घर आँगन को स्वच्छ रखें, गंदगी हटाएँ।

                 वातावरण बनाएँ ऐसा, जो सबको ही भाये॥

                                तुरंत बनाएँ, ताज़ा खाएं, बासी न बचने पाये।

                                                    न हो भोजन की बर्बादी, न ही कोई रोग सताये॥


साफ रखेँ, कंबल, गद्दे, चादर और तकिये।

                   और साफ ही खाट, पलंग, तख्ते को रखिए॥

                                     साफ सफाई न होगी तो खटमल परेशान करेंगे।

                                                      ख़ून चूस करके शरीर का, कमजोर, बीमार करेंगे॥


मक्खी और मच्छर से ख़ुद को आप बचाएं।

                     ऐसी करें व्यवस्था की ये पास न आयें॥

                                       सड़े गले कचरे, गंदगी जहाँ मिलेगी ।

                                                      हैजा, कालरा लेकर मक्खी वहीं पलेगी॥


दस्त और पेचिश से हरदम परेशान रहेंगे।

                                              यदि थोड़ा भी मक्खी से आसावधान रहेंगे॥


महाकाल का रूप ये मच्छर जीवन सत्यानाश करेंगे।

                 जहाँ भी होगा पानी एकत्रित, वहीं पे ये विकास करेंगे॥

                                     यदि थोड़ी सी सावधानी लेंगे मच्छर दूर भगाएँगे।

                                                  डेंगू, मलेरिया, औ फाइलेरिया पास नहीं आएंगे॥


घर के आस पास के नाली को ढक डालें।

                   खुले हुए गड्ढों में किरोसिन तेल ही डालें॥

                                  ढकी नालियाँ नाले हों तो यह सबसे बेहतर होगा।

                                                जालीदार खिड़की दरवाजे रखना ही हितकर होगा॥

 

मच्छर से बचाने के लिए मच्छरदानी रोज़ लगाएँ।

                                   मच्छर रोधी क्रीम या फिर प्रतिकर्षी धूप जलाएँ॥


सड़े हुए फल और सब्जियाँ कभी न लाएँ।

                 खुली हुई बाज़ारू चीजें कभी न खाएं॥

                              हरी सब्ज़ियों और फलों को यदि धोकरके खायेंगे।

                                                   पेट मे पलने वाले कीड़ों से  छुटकारा पायेंगे॥


जीवन है अनमोल इसे समझे और पहचानें।

                                          बचाव है इलाज़ से बेहतर, बातें “सूरज” की मानें॥


                                                                          डॉ॰ सूर्या बाली “सूरज”

एड्स-कुंडलियाँ

(1)

दवा न कोई बन सकी न कोई वैक्सीन।

एड्स से बचने के लिए सदा रहो तल्लीन।

सदा रहो तल्लीन और कंडोम लगाओ।

जब भी अंजाने के संग संबंध बनाओ।

अगर हो गया एड्स मरोगे तिल तिल करके।

आओ करें बचाव सभी ही मिल जुल करके।

(2)

एचआईवी विषाणु ने मचा दिया भूचाल।

रोक सके इसको, कही कोई है माई का लाल।

है माई का लाल कोई तो आगे आए।

कैसे रोके एड्स कोई तो दवा बताए।

कहे सूरज सब लोग रहो सावधान एड्स से।

वरना हो जाओगे सब परेशान एड्स से।

(3)

आ जाने से एड्स के त्रस्त हुआ संसार।

टबलेट, इंजेक्सन  औ टीका सभी हुए बेकार।

सभी हुए बेकार, बचाव एक मात्र तरीका।

असुरक्षित यौन संबंध, काल बनेगा जी का।

जांच करके ही ख़ून सबको चढ़वाएँ।

नशे की सुई न लें, एड्स से बचें बचाएं।

 

(4)

एड्स विषाणु जनित रोग सबके जीवन मे विष घोलेगा।

आज नहीं कुछ साल बाद, जब ये सिर चढ़के बोलेगा।

सिर चढ़के बोलेगा अविभावक जब मर जाएँगे।

उनके बच्चे होंगे अनाथ और दर दर ठोकर खाएँगे।

नई समस्या होगी देश पे, कुछ भी नहीं कर पाएंगे।

अगर अभी से नहीं चेते तो, रोगी बढ़ते जाएंगे॥

(5)

सूरज इस संसार को घेरा एड्स का रोग।

निराकरण का दूर तक, न दिखता कोई योग।

न दिखता कोई योग, हुआ बेकार तमाशा।

मिली दवा न कोई लगी बस हाथ निराशा।

समय से पहले संभलें, वरना पश्याताप करेंगे।

एड्स को यदि जाने समझेगे तभी बचेंगे ॥

                                                                   डॉ॰ सूर्या बाली "सूरज"

परिवार नियोजन

निकल आया है क्षितिज पे सूर्य, लिए मानवता का संदेश।

जागो नर - नारी भारत के, बचा लो अपना सुंदर देश।।

                 समस्याएँ जन्मी बहु भांति, बढ़ी जनसंख्या अपरंपार।

                लगे घटने सब संसाधन, मगर बढ़ती ही गयी कतार ॥

चला दो ऐसा इक अभियान, मिले सबको,सबके अधिकार।

चाहते यदि रहना खुशहाल, करो छोटा अपना परिवार॥

               करो बस पैदा दो संतान, तीसरे की न करना भूल।

               चाहे लड़का हो या लड़की, खुशी से करना उसे क़बूल॥

सुरक्षित रखो बच्चों का स्वाथ्य, न पड़ने दो उनको बीमार।

बीसीजी, डीपीटी, पोलियो, खसरे का टीका दो  क्रमवार॥

               उचित शिक्षा का करो प्रबंध, उचित भोजन दो, उच्च विचार।

               करो लड़के- लड़की मे न भेद, दोनों को दो समान अधिकार॥

सोचना तब दूजे की बात, पहला जब जाने लगे स्कूल।

कम से कम तीन साल अंतराल, इससे पहले न करना भूल॥

              रुकेगा तन और मन का विकास, अगर लंबा होगा परिवार।

              लगाओ कापर- टी और लूप, बढ़ाओ धरती पे न भार॥

प्रयोग निरोध का करके तुम, रख सकोगे सीमित परिवार !

अपने सपनों की खुशियों को, कर सकोगे तब तुम साकार॥

                                                               डॉ॰ सूर्या बाली “सूरज”

पोलियो

सफल बनाओ सब मिल करके, पल्स पोलियो का अभियान।

पूर्ण करो इस महा यज्ञ को, दे करके योगदान महान।

            पोलियो का उन्मूलन करना, अब कर्तव्य हमारा है,

            अब हम सबने मिलकर के, इस पोलियो को ललकारा है।

देकर के वैकसीन बच्चों को, ये अभिशाप मिटाना है,

पल्स पोलियो प्रतिरक्षण अभियान को सफल बनाना है।

            पोलियो विषाणु जनित रोग, पैरों की शक्ति घटा देता है।

            बचपन मे यदि हो जाये, जीवन भर पंगु बना देता है।

दूषित भोजन पानी के जरिये मानव तक आता है,

घुसता है आहरनाल से , तंत्रिका तंत्र को खाता है।

            चढ़ता है बुखार तेज़ और अंग शिथिल पड़ जाते हैं,

            पक्षाघात हो जाता है, बच्चे लंगड़े हो जाते हैं।

कोई विशेष इलाज़ नहीं,बस मात्र बचाव तरीका है,

पूर्ण सुरक्षा के लिए केवल पोलियो का टीका है।

            पोलियो टीकाकरण को ख़ुद समझें औरों को बताएं,

            पाँच साल तक के बच्चो को, पोलियो ड्राप अवश्य पिलाएं।

इस टीके से बच्चों को कोई हानि नहीं होती है,

जो माँ ड्रॉप नहीं पिलवाती वो जीवन भर रोती हैं।

            “सूरज” पूरे जनमानस को, ये संदेश सुनाना है,

            अपने प्यारे भारत को, पोलियो से मुक्त कराना है।।

                              डॉ॰ सूर्या बाली “सूरज”

स्तनपान

मिले शिशु को समुचित मातृत्व, और माता का प्यार दुलार,

कराओ शिशु को स्तनपान , मिले जिससे उसे उचित आहार।1।

जन्म के तीस मिनट के बाद, शिशु को दो माता का दूध,

न दो कोई बाहर की चीज, शहद हो या हो गाय का दूध।2।

                  पिलाएँ माँ स्तन से दूध, जन्मेगा माँ शिशु के बीच प्यार,

                  न वंचित करो उसे इससे, है उसका जन्मसिद्धि अधिकार।3।

                 सुरक्षित, स्वच्छ, स्वाथ्यकर है, सुलभ, सस्ता है और सुपाच्य,

                 और ये उचित ताप पर ही,  शिशु को हो जाता है प्राप्य।4।

चूसने से माँ का स्तन, दाँत-जबड़े होते मज़बूत,

बनता है माँ और शिशु के बीच, एक अनवरत प्रेम का सूत।5।

दूध मे माँ के अधिकता मे, होती है प्रतिरोधी प्रोटीन,

बचाती शिशु को रोगों से, जो होती है प्राकृतिक वैक्सीन।6।

                        दूध से माँ के बढ़कर के, नहीं कोई है और आहार ,

                       कृत्रिम शिशु आहारों के सभी, रँगीले विज्ञापन बेकार।7।

                       जहां तक संभव हो पाये, शिशु को दो माता  का दूध,

                     करे वो जब-2 इसकी मांग, पिलाएँ तब-2 उसको दूध।8।

दूध से माँ के मिलती है, शिशु को विटामिन-ए  भरपूर,

जो देती है नैनों को ज्योति, रखती है अंधेपन से दूर।9।

जन्म के चार माह तक तो, दूध माता का है सम्पूर्ण,

यहाँ तक कि पानी की भी, जरूरत हो जाती है पूर्ण।10।

                    पूर्ण पोषण के लिए बना, माँ का दूध सर्वोत्तम आहार,

                    इसमें हैं सभी आवश्यक तत्व, उचित मात्रा में भली प्रकार।11।

                     तुरंत प्रसव के बाद, रखिए माँ और शिशु को एक साथ,

                     इसे “रूमिंग इन” कहते हैं, पैदा करता है ये विश्वास।12।

पिलाती नहीं जो शिशु को दूध, करती हैं वो माएँ अन्याय,

स्तन कैंसर कि संभावना, उनमे हो जाती है अधिकाय।13।

रोकना चाहते हो यदि गर्भ, चाहते करना कम संतान,

बातें “सूरज” कि मानो तुम, कराओ शिशु को स्तनपान।14।

                                                                    डॉ॰ सूर्या बाली “सूरज”

कुष्ठ रोग (Leprosy)

कुष्ठ रोग है रोग पुराना, सदियों से इससे नाता है।

लेप्रोसी या हेनसन रोग के नाम से भी जाना जाता है।

श्राप नहीं है ईश्वर का ये पूर्वजन्म का पाप नहीं,

क्यूँ डरना आखिर इससे, ये कोई अभिशाप नहीं।।

           

            दीर्घस्थायी संक्रामक रोग, कोढ़ भी जो कहलाता है।

            माइक्रोबक्टेरियम लेप्री जीवाणु इसे फैलता है।

            इस जीवाणु को केवल मानव शरीर ही भाता है।

           भीड़, नमी, गंदी जगहों मे ये अक्सर पाया जाता है॥

 

वैसे तो यह रोग किसी भी मानव को हो सकता है।

लेकिन बच्चों, युवाओं मे कुछ ज्यादा ही दिखता है।

पुरुषों की तुलना मे औरतें कम ही प्रभावित होती हैं।

कुष्ठ रोग की बीमारी मलिन बस्तियों मे ज्यादा होती है।।

           

             छूआछूत से ये जीवाणु एक दूजे मे आ जाता है।

            धीरे धीरे मानव तन को अपना ग्रास बनाता है।

            मुख्य रूप से तंत्रिका तंत्र को,ये जीवाणु अपनाता है।

            चमड़ी, हड्डी, पेशी, वृषण कोषाओं को ये खाता है।।

 

खटमल- मच्छर के भी काटने से रोग हो सकता है।

गोदना गुदवाने से भी इसका प्रसार हो सकता है।

अब हम आपको कुष्ठ रोग के मुख्य लक्षण बतलाते हैं।

हल्के, तांबई रंग के चकत्ते चमड़ी पे पड़ जाते हैं।।

           

            इन चकत्तों की चमड़ी, झुर्रीदार शुष्क हो जाती है।

            रोएँ, बाल सब झड़ जाते हैं, त्वचा सुन्न हो जाती है।

            शीत-गरम का पता न चलता, अंग सुन्न हो जाता है।

            तंत्रिका का मोटा होना प्रारम्भिक लक्षण माना जाता है।।

 

अगर समय रहते इसका उपचार नहीं हो पाता है।

या मरीज सामाजिक डर से रोग को और छुपाता है।

तब ये रोग फैल करके काफी नुकसान कराता है।

अंगुलियाँ गलने लगती है, रोगी अपंग हो जाता है।।

           

            त्वचा के नीचे छोटी छोटी गाँठे भी बन जाती हैं।

            हाथ-पांव के घाव न भरते, नाक चपटी हो जाती है।

            भारत सरकार ने इसे खत्म करने का संकल्प उठाया है।

            इसलिए राष्ट्रीय कुष्ठ रोग उन्मूलन अभियान चलाया है।।

 

इसके अंतर्गत रोगी की मुफ्त जांच की जाती है।

अगर रोग होता है तो उसे मुफ्त दावा दी जाती है।

रोगी के उपचार हेतु एम0डी0टी0 पद्धति अपनाते हैं।

रिफैम्सीन, डेपसोन और क्लोफाजिमीन खिलाते हैं।।

           

            लाइलाज यह रोग नहीं कुछ दिन मे ठीक हो जाता है।

            यदि रोगी नियमित रूप से तीनों दवाएं खाता है।

            रोग छुपाएँ नहीं कभी, न ही कोई अफसोस करे।

            फ़ौरन डॉक्टर को दिखलाए, तनिक नहीं संकोच करें।।

 

सहयोग करें, सम्मान करें उसे उचित राय ही बतलाएँ।

यदि कोई रोगी हो तो उसे डॉक्टर से अवश्य मिलाएँ।

घृणा नहीं उससे करिए यदि रोग किसी को हो जाये।

कोढ़ी कहके न पुकारें उसे, मन व्यथित न उसका हो जाये।।

          

              मदद करेंगे रोगियों की आओ सब मिल संकल्प करें ।

            “सूरज” की बातें माने , रोगी का काया कल्प करें॥

 

                                          डॉ॰ सूर्या बाली “सूरज”

 

 

 

 

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