डॉ॰ सूर्या बाली "सूरज"

यकीं मुझको है तुम आओगे इक दिन

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31 मई को विश्व तंबाकू रहित दिवस पर विशेष कविता

May 31, 2012 at 23:50

धूम्रपान एक विकट समस्या जो समाज पर छाई है।

मानवता को डसने खातिर बनके नागन आई है॥


बीड़ी हुक्का चिलम औ चुट्टा सिगरेट पाइप और सिगार।

इन्हें त्यागिए इनसे बचिए धूम्रपान के भिन्न प्रकार॥

समय जो रहते न चेते तो दुनिया में रुसवाई है॥

मानवता को डसने खातिर.........


सुर्ती खैनी पान मसाला ज्यादा गुटखा खाओगे।

पेट फेफड़े मुंह के कैंसर से पीड़ित हो जाओगे॥

सेवन करना तंबाकू का समझो बड़ी बुराई है॥

मानवता को डसने खातिर..........


सिगरेट बीड़ी पीकरके जो आप न धुआँ उड़ाते।

परेशान न होते इतना ना ये खांसी पाते॥

धूम्रपान की आदत छोड़ो इसमे बहुत भलाई है॥

मानवता को डसने खातिर....


धूम्रपान न चिंता हटाता न ही खुशी दिलाता है।

उलटे दुर्बलता लाता है इच्छा शक्ति घटाता है॥

आसानी से छोड़ सकोगे मत सोचो कठिनाई है॥

मानवता को डसने खातिर......


जो करते हैं धूम्रपान टी बी भी उन्हे सताती है।

सांस फूलती, ब्रांकाइटिस और खांसी हो जाती है॥

नाश करेगी सारे तन का काल ये बन के आई है॥

मानवता को डसने खातिर.....


बहुत दिनों तक धूम्रपान से कैंसर भी हो जाता है।

तिल तिल करके मरना होता जीवन नर्क बनाता है॥

तब केवल पछताना होता आती बड़ी रुलाई है॥

मानवता को डसने खातिर........


31 मई को विश्व तंबाकू रहित दिवस मानते हैं।

तंबाकू से बचके रहने की बातें बतलाते हैं॥

धूम्रपान जो त्याग चुके “सूरज” की उन्हें बधाई है॥

मानवता को डसने खातिर बाँके नागन आई है॥

 

                              डॉ. सूर्या बाली “सूरज”

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