डॉ॰ सूर्या बाली "सूरज"

यकीं मुझको है तुम आओगे इक दिन

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है आज भ्रष्टाचार सवालों के घेरे में

है आज भ्रष्टाचार, सवालों के घेरे में॥

चढ़ता हुआ बाज़ार सवालों के घेरे में॥

 

लाचार सी, मजबूर, परेशान है जनता,

अब आ गयी सरकार सवालों के घेरे में॥

 

है लूटता इस देश की दौलत कभी इज्ज़त,

नेता का कारोबार सवालों के घेरे में॥

 

किसने लगाई आग इशारों इशारों मे,

जलती दरो-दीवार सवालों के घेरे में॥

 

गुर्दा, जिगर, दिल और लहू बेचता है वो,

*चारागरी  इस बार सवालों के घेरे में॥

 

                   डॉ॰ सूर्या बाली "सूरज"

*चारागरी=डाक्टरी, चिकित्सा

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