सामने है खड़ी दीवार ख़ुदा ख़ैर करे।
रास्ता हो गया दुश्वार ख़ुदा ख़ैर करे॥
अब तो हर चीज़ जुदाई में बुरी लगने लगी,
फूल भी लगने लगे ख़ार ख़ुदा ख़ैर करे॥
जाने किस बात से हमसे वो रूठे रूठे हैं,
बदले बदले से हैं सरकार ख़ुदा ख़ैर करे॥
हर कोई चाहता महबूब बनाना उनको,
खींच ली सबने है तलवार ख़ुदा ख़ैर करे॥
रात दिन चैन से सोने नहीं देती मुझको,
उनके पाज़ेब की झंकार ख़ुदा ख़ैर करे॥
बात दिल की मेरे होठों
पे आ न जाये कहीं,
हो ना जाये कहीं इज़हार ख़ुदा ख़ैर करे॥
बन सँवर के सरे बाज़ार वो निकले “सूरज”
हो गए हम भी गिरफ़्तार ख़ुदा ख़ैर करे॥
डॉ. सूर्या बाली “सूरज”