डॉ॰ सूर्या बाली "सूरज"

यकीं मुझको है तुम आओगे इक दिन

header photo

शाख़ से टूटा हुआ पत्ता किधर जाएगा

शाख़ से टूटा हुआ पत्ता किधर जाएगा।

रुख़ हवाओं का जिधर होगा उधर जाएगा॥

 

प्यार जब आँखों से इस दिल में उतर जाएगा॥

दिल पे कर लेगा हुकूमत औ ठहर जाएगा॥

 

तुम जो बेपर्दा कभी हो के चमन में आओ,

रंग फूलों और कलियों का निखर जाएगा॥

 

बहुत नाज़ुक है ज़रा खेलो सँभलकर इससे,

शीश-ए-दिल जो अगर टूटा बिखर जाएगा॥

 

क़समें खाता था बहुत वादे किया करता था,

क्या पता था सरे-महफिल वो मुक़र जाएगा॥

 

साथ ग़र तू है तो ग़म कोई नहीं है “सूरज”,

वक़्त कैसा भी हो हंस रो के गुज़र जाएगा॥

 

                  डॉ॰ सूर्या बाली “सूरज”

Go Back

Comments for this post have been disabled.