डॉ॰ सूर्या बाली "सूरज"

यकीं मुझको है तुम आओगे इक दिन

header photo

वो दिल तोड़कर मेरा जाने लगे हैं

May 4, 2012 at 07:29

वो दिल तोड़कर मेरा जाने लगे हैं॥

मोहब्बत से दामन छुड़ाने लगे हैं॥

ये मजबूरियाँ हैं या उनकी ज़रूरत,

बहाने बहुत वो बनाने लगे है॥

पशेमाँ बहुत आजकल दिख रहे हैं,

सभी से वो नज़रें चुराने लगे हैं॥

कभी मयकदे से जो करते थे तौबा,

वही आज पीने पिलाने लगे हैं॥

तसव्वुर किए हम भी बैठे हैं उनका,

वो मेरे ख़यालों में आने लगे हैं॥

वफ़ा की समझ जिनको कुछ भी नहीं है,

सबक़ वो वफ़ा का पढ़ाने लगे हैं॥

जिन्हे मैंने रस्ते पे चलना सिखाया,

वही मुझको रस्ता दिखाने लगे हैं॥

भुलाया था जिनको बड़ी मुश्किलों से,

वो रह रह के फिर याद आने लगे हैं॥

ये कैसा असर हो गया उनपे “सूरज”,

रक़ीबों सा तेवर दिखाने लगे हैं॥

                              डॉ. सूर्या बाली “सूरज”

Go Back

Comments for this post have been disabled.