डॉ॰ सूर्या बाली "सूरज"

यकीं मुझको है तुम आओगे इक दिन

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लाख कोशिश करो मुझको ना भुला पाओगे

लाख कोशिश करो मुझको ना भुला पाओगे।

क़रीब दिल की धड़कनों के सदा पाओगे।

 

जला तो सकते हो ख़त को मेरी तस्वीर को तुम,

प्यार जो दिल मे है क्या उसको मिटा पाओगे।

 

मेरे ख़यालों मे ही खोये रहोगे हरदम,

दिल कहीं और अब तुम न लगा पाओगे।

 

हर कदम पे किसी की होगी ज़रूरत तुमको,

ज़िंदगी लंबी है, तन्हा न निभा पाओगे।

 

प्यार “सूरज” का तुम्हें याद आएगा हर पल,

जुदाई के कहीं दो पल न बिता पाओगे।

                                   -डॉ॰ सूर्या बाली “सूरज”

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