डॉ॰ सूर्या बाली "सूरज"

यकीं मुझको है तुम आओगे इक दिन

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लाखों में एक है वो बड़ा लाज़वाब है

लाखों मे एक है वो, बड़ा लाज़वाब है।  

रुख़ उसका जैसे कोई हसीं माहताब है॥


               हर इक वरक़ मे इश्क़, मोहब्बत के फ़लसफे,

               पढ़ इसको सारी उम्र, ये दिल की किताब है॥


जल जाओगे ये खेलने, की चीज़ है नहीं,

जुगनू न समझ उसको, वो इक आफ़ताब है॥


              आने को है बेताब, बहुत हुस्न ये बाहर,

              ज़ुल्फों का मगर आपके रुख़ पे हिजाब है॥


जो छीनता ग़रीब का हक़ और रोटियाँ,

दुनिया की निगाहों मे वही कामयाब है॥


               ज़िंदा है मेरे दिल मे अभी प्यार तुम्हारा,

               अब भी मेरी किताब मे सूखा गुलाब है॥


रातों की नींदे लेके जो बेचैन कर गया,

अभी भी इन आँखों मे वो हसीन ख़्वाब है॥


                हासिल करेगा “सूरज” ज़माने की हर खुशी,

                तारीकियों मे नूर का वो इंकलाब है॥


                                      डॉ॰ सूर्या बाली “सूरज”

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