डॉ॰ सूर्या बाली "सूरज"

यकीं मुझको है तुम आओगे इक दिन

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रौशनी जबसे तेरे हम क़रीब आये है

रौशनी जबसे तेरे हम क़रीब आये है।

प्यार मे, शौक़ से हम जान भी लुटाए हैं॥


                अब मुझे खौफ नही होता कभी मरने का,

                होने क़ुरबान तेरे पास  चले आए हैं॥


हौसला जब भी किया दिल ने तुझे  पाने का,

तू  मुझे मिल न सका  ज़ख्म बहुत खाए हैं॥


                तू अगर पास है तो साथ है ज़माना भी,

                बिन तेरे ज़िंदगी मे लोग सब पराए हैं॥


शाम होते ही तेरा इंतज़ार होता है,

देर से राह मे पलकों को हम बिछाए हैं॥


                दर्द बर्दास्त नही  जब हुआ जुदाई का,

                होके  मज़बूर बहुत जाम फिर उठाए हैं॥


                                  डॉ॰ सूर्या बाली “सूरज”

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