डॉ॰ सूर्या बाली "सूरज"

यकीं मुझको है तुम आओगे इक दिन

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ये ज़मीं ये आसमां, कल रहे या न रहे।

September 22, 2011 at 17:41

ये ज़मीं ये आसमां, कल रहे या न रहे।

ये हसीं महफिल जवां, कल रहे या न रहे।।

            इस जहाँ मे बाँट दे, जो कुछ भी तेरे पास है,

            ये हुनर तेरी अमानत कल रहे या न रहे।।

छोड़ा ना दामन मैं ग़म का, क्यूंकि मुझको था यकीं,

ये ख़ुशी कुछ पल की है, कल रहे या न रहे।।

            माटी के पुतले पे इतना क्यूँ भरोसेमंद हो,

            दिल मे जो आए वो कर लो, कल रहे या न रहे।।

सब तो मतलब के हैं रिश्ते, कौन किसका है यहाँ,

आज रिश्ता ख़ास है जो, कल रहे या न रहे।।

            खोलकर दिल बात कर लो, न रहे शिकवे गिले,

           साथ “सूरज” का औ तेरा, कल रहे या न रहे।

                                            डॉ॰ सूर्या बाली, “सूरज”

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