डॉ॰ सूर्या बाली "सूरज"

यकीं मुझको है तुम आओगे इक दिन

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ये पैसा जब से लोगों का ईमान हो गया है

ये पैसा जब से लोगों का ईमान हो गया।

दिल बेचना ख़रीदना आसान हो गया ॥


               लुट जाता  है किसी का, तो खोता है किसी का,

              दिल, दिल नही है अब तो ये समान हो गया॥


 घर कितनों के उजड़े हैं, कितनों के लुट गए,

इस दिल के पीछे कितनों का नुक़सान हो गया॥


               इक ऐसी चली आँधी कि मुरझा गया ये बाग़,

               सहरा की तरह दिल मेरा वीरान हो गया॥


उगता है जिसके हुक़्म से "सूरज" वो और है,

इंसान ये न समझे कि वो  भगवान हो गया॥


                                                 डॉ॰ सूर्या बाली “सूरज”

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