डॉ॰ सूर्या बाली "सूरज"

यकीं मुझको है तुम आओगे इक दिन

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बुरा है लाख मगर दिल को तू बुरा न लगे

September 18, 2013 at 23:22

तू मुझसे दूर भी रहकर कभी जुदा न लगे॥

बुरा है लाख मगर दिल को तू बुरा न लगे॥

 

सलामती की तेरे रब से दुआ करते हैं,

तुझे बिगड़ते हुए शहर की हवा न लगे॥

 

जहां भी जाये तुझे खुशियाँ बेशुमार मिले,

कभी किसी की तुझे कोई बददुआ न लगे॥

 

करीब दिल के ज़रा लौट के फिर आ जाओ,

तेरे बगैर मुझे और कुछ भला न लगे॥

 

दिमाग कहता है तुझको भला बुरा लेकिन,

मगर तू दिल को कभी मेरे बेवफ़ा न लगे॥

 

जो प्यार करता है सच झूठ जान जाता है,

भले ज़माने को तेरी ख़बर पता न लगे॥

 

कभी भी दिल के क़रीब उसको न लाना “सूरज”,

तुम्हारे दिल की कसौटी पे जो खरा न लगे॥

 

डॉ॰ सूर्या बाली “सूरज”

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