डॉ॰ सूर्या बाली "सूरज"

यकीं मुझको है तुम आओगे इक दिन

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परिवार नियोजन

September 27, 2011 at 19:55

निकल आया है क्षितिज पे सूर्य, लिए मानवता का संदेश।

जागो नर - नारी भारत के, बचा लो अपना सुंदर देश।।

                 समस्याएँ जन्मी बहु भांति, बढ़ी जनसंख्या अपरंपार।

                लगे घटने सब संसाधन, मगर बढ़ती ही गयी कतार ॥

चला दो ऐसा इक अभियान, मिले सबको,सबके अधिकार।

चाहते यदि रहना खुशहाल, करो छोटा अपना परिवार॥

               करो बस पैदा दो संतान, तीसरे की न करना भूल।

               चाहे लड़का हो या लड़की, खुशी से करना उसे क़बूल॥

सुरक्षित रखो बच्चों का स्वाथ्य, न पड़ने दो उनको बीमार।

बीसीजी, डीपीटी, पोलियो, खसरे का टीका दो  क्रमवार॥

               उचित शिक्षा का करो प्रबंध, उचित भोजन दो, उच्च विचार।

               करो लड़के- लड़की मे न भेद, दोनों को दो समान अधिकार॥

सोचना तब दूजे की बात, पहला जब जाने लगे स्कूल।

कम से कम तीन साल अंतराल, इससे पहले न करना भूल॥

              रुकेगा तन और मन का विकास, अगर लंबा होगा परिवार।

              लगाओ कापर- टी और लूप, बढ़ाओ धरती पे न भार॥

प्रयोग निरोध का करके तुम, रख सकोगे सीमित परिवार !

अपने सपनों की खुशियों को, कर सकोगे तब तुम साकार॥

                                                               डॉ॰ सूर्या बाली “सूरज

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