डॉ॰ सूर्या बाली "सूरज"

यकीं मुझको है तुम आओगे इक दिन

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परिवार नियोजन और शादी की सही उम्र

December 15, 2011 at 00:07

शादी से शुरुआत है होती, एक नए परिवार की।

रचना करते मिलकर दो दिल, एक नए संसार की॥

सही उम्र मे लड़का-लड़की यदि करते विवाह हैं।

तब शादी सुखमय जीवन, उज्ज्वल भविष्य की राह है॥

लड़की की शादी तब करना, जब हो अठरह साल की।

इससे पहले राह न पकड़े, वो अपने ससुराल की॥

सही उम्र लड़के की शादी की, इक्कीस के बाद है।

इससे पहले शादी करना, क़ानूनन अपराध है॥

सही उम्र मे शादी से, फ़ायदा होता हर बात का।

अवसर मिलता शारीरिक एवं मानसिक विकास का॥

पढ़ लिखके आत्म निर्भर हो, समझे अपने अधिकार को।

छोड़े रूढ़िवादी रस्मों को, अपनाएं नए विचार को॥

शादी के उपरांत रखेँ, सीमित अपने परिवार को।

वैवाहिक जीवन का मज़ा लें, जाने इस संसार को॥

गर्भ निरोधक अपना के, बच्चा टालें कुछ साल तक।

समय रहते यदि न चेते तो, पछतायेंगे सौ साल तक॥

माँ बनने की सही उम्र भी बीस साल के बाद हो।

जिससे जीवन सुखमय हो जच्चा बच्चा आबाद हों॥

बच्चे की तब सोचें, जब पति पत्नी जिम्मेदार हों।

शिशु के लालन पालन को, दोनों ही तैयार हों॥

दो बच्चों के बीच फ़ासला, कम से कम तीन साल हो।

जिससे शिशु और माँ, दोनों ही खुशहाल हों॥

एक ही या दो बच्चे सोचें, अपनाएँ परिवार नियोजन को।

जिससे बच्चों को दे पाये,अच्छे कपड़े, घर, भोजन को॥

बढ़ती जनसंख्या को रोकें, बचाएं हिंदुस्तान को।

रोटी, कपड़ा, मकां मिल सके, जिससे हर इंसान को॥

सही उम्र मे शादी करके, अपना फ़र्ज़ निभाएँ आप।

औरों को भी शादी की, सही उम्र बतलाएँ आप॥

                                                              डॉ॰ सूर्या बाली “सूरज”

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