डॉ॰ सूर्या बाली "सूरज"

यकीं मुझको है तुम आओगे इक दिन

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देखता रहता है हम सब को ख़ुदा याद रहे

March 26, 2014 at 14:47

जब भी तुम करना यहाँ कोई ख़ता याद रहे

देखता रहता है हम सब को ख़ुदा याद रहे

 

उसकी नज़रों से नहीं छिपता है कोई भी गुनाह

सबको देता है गुनाहों की सज़ा याद रहे

 

नूर से उसके ही रौशन है जहां की हर शै

फूल तितली में उसी की है अदा याद रहे

 

जिसके दिल में न हो ईमान अना सच्चाई

वो किसी से भी नहीं करता वफ़ा याद रहे

 

जो भी जलता है यहाँ उसको तो बुझना होगा

एक दिन सबको ही होना है फ़ना याद रहे

 

गुल से ख़ुशबू की तरह आँख से आँसू की तरह

तुमसे हो जाऊंगा इक रोज़ जुदा याद रहे

 

हिकमतें आप की जब काम नहीं आती हैं

रंग लाती है बुज़ुर्गों की दुआ याद रहे

 

प्यार से जीत लिए जाते हैं दुश्मन यारो

प्यार हर दर्द की होती है दवा याद रहे

 

मुझको मझधार में यूं छोड़ के जाने वाले

कोई तुझको भी कभी देगा दग़ा याद रहे

 

ग़लतियाँ मेरी शबो रोज़ गिनाने वाले

तुमने भी की है कई बार ख़ता याद रहे

 

जिसपे भी हद से ज़ियादा है भरोसा ‘सूरज’

एक दिन देगा वही तुमको दग़ा याद रहे

 

डॉ सूर्या बाली ‘सूरज’

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