डॉ॰ सूर्या बाली "सूरज"

यकीं मुझको है तुम आओगे इक दिन

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दिल से नफ़रत को हटाकर देखो

October 25, 2011 at 01:49

दिल से नफ़रत को हटाकर देखो।

थाल पूजा के सजाकर देखो॥


आ गई नूर1 भरी दिवाली,

दीप खुशियों के जलाकर देखो॥


जश्न है, शोर है पटाखों का,

फूलझड़ियों को छुड़ाकर देखो॥


खूबसूरत लगेगी ये दुनिया,

तीरगी2 दिल की मिटाकर देखो॥


दो कदम बढ़ के भरो बाहों मे,

ज़िद की दीवार गिराकर देखो॥


साथ था कारवां कभी मेरे,

अब मैं तन्हा हूँ ये आकर देखो॥


फूल ही फूल नज़र आएंगे,

राह से खार3 हटाकर देखो॥


दिल को आराम मिलेगा तेरे,

रोते बच्चे को हँसाकर देखो॥


होके मदहोश सभी झूमेंगे,

जाम नज़रों से पिलाकर देखो॥


ये जहां साथ गुनगुनाएगा,

तुम ग़ज़ल मेरी तो गाकर देखो॥


दौड़ा “सूरज” भी चला आएगा,

दिल से इकबार बुलाकर देखो॥

 

                      डॉ॰ सूर्या बाली "सूरज"

नूर1=उजाला,  तीरगी2=अंधेरा, खार3=कांटा

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