डॉ॰ सूर्या बाली "सूरज"

यकीं मुझको है तुम आओगे इक दिन

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दिल को काबू में हम रखें कैसे

March 11, 2013 at 09:54

दिल को काबू में हम रखें कैसे।

तुझसे अब दूर भी रहें कैसे॥

बंदिशे हर तरफ ज़माने की,

ऐसे हालात में जिएँ कैसे॥

रात डसती है दिन डराते हैं,

ग़म जुदाई का अब सहें कैसे॥

तेरी आँखों में जब हो आंसूँ तो,

हम यहाँ पर भला हंसें कैसे॥

तेरी रुशवाइयों से डरते हैं,

हाले दिल अपना हम कहें कैसे॥

बेबसी दर्द रंजो ग़म अपना,

सबसे आखिर बयां करें कैसे॥

हमसफ़र साथ जब नहीं “सूरज”

इतना लंबा सफ़र चलें कैसे॥

डॉ॰ सूर्या बाली “सूरज”

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