डॉ॰ सूर्या बाली "सूरज"

यकीं मुझको है तुम आओगे इक दिन

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दिया है ग़म बहुत सारा किसी ने प्यार के बदले

दिया है ग़म बहुत सारा किसी ने प्यार के बदले॥

थमाये फूल हैं मैंने उसी को खार के बदले॥

 

हमारी लुट गयी दुनिया मगर सरकार कहती है,

मिलेंगे कुछ न कुछ पैसे मेरे घर बार के बदले॥

 

मिला है दर्द ग़म धोका तड़प आँसू उदासी सब,

दिया क्या क्या नहीं तुमने हमारे प्यार के बदले॥

 

मसीहा हूँ मेरे भी पास है दिल आप जैसा ही,

मगर सब कुछ मैं सहता हूँ इसी किरदार के बदले॥

 

अना, इज्ज़त, सदाक़त और ईमाँ बेंच देते हैं,

लुटा देते हैं बंदे जान भी दीनार के बदले॥

 

न चुप बैठो जो दिल में है उसे होठों पे ले आओ,

करो इक़रार तुम भी कुछ मेरे इज़हार के बदले॥

 

लड़ाई झगड़े से कुछ तो हुआ हासिल नहीं “सूरज”

मोहब्बत अम्न फैलाओ सभी तकरार के बदले॥

 

डॉ. सूर्या बाली “सूरज”

 

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