डॉ॰ सूर्या बाली "सूरज"

यकीं मुझको है तुम आओगे इक दिन

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खुल के हम इंसान से इंसान की बातें करें

October 29, 2011 at 23:55

खुल के हम इंसान से इंसान की बातें करें॥

हौसले, उम्मीद औ इमकान[1] की बातें करें॥


छोड़कर चक्कर लगाना अब इबादतगाह[2] का,

रूह[3] के भीतर बसे भगवान की बातें करें॥


राह दिखलाती हैं जो सबको अमन औ चैन की,

बाइबिल, गीता की औ क़ुरआन की बातें करें॥


तोड़ डालें मज़हबी दीवार आओ हम सभी,

प्यार से मिल जुल के हिंदुस्तान की बातें करें॥


जो दिलों मे प्यार भरदे, औ लबों पे दे हंसी ,

सूर, मीरा, जायसी, रसखान की बातें करें॥


क्या ज़माना आ गया क़ातिल सभी मुंसिफ़[4] हुए,

कल के बेईमान अब ईमान की बातें करें॥


रौशनी कर दे, मिटा दे ज़िंदगी की तीरगी[5],

चाँद, “सूरज”, तारों के उनवान[6] की बातें करे॥

                

                                           डॉ॰ सूर्या बाली “सूरज”



[1] इमकान=संभावनाएँ 2 इबादतगाह= पूजा स्थल 3 रूह=आत्मा 4 मुंसिफ़=न्यायाधीश 5 तीरगी=अंधेरा 6 उंवान=संदर्भ,हेडिंग

 

 

 

 

 

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