डॉ॰ सूर्या बाली "सूरज"

यकीं मुझको है तुम आओगे इक दिन

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इस दुनिया मे दिलवाले ही क्यूँ आंखे नम करते हैं

November 27, 2011 at 14:04

इस दुनिया मे दिलवाले ही क्यूँ आंखे नम करते हैं॥

दिल की बातें दिल मे रखकर जाने क्यूँ ग़म सहते हैं॥


उजड़े कितने गुलशन दिल के, रिश्ते चाहत के टूटे,

लेकिन इन सूनी पलकों मे अब भी सपने बसते हैं॥


 अक्सर मैंने देखा है, जिनके ख़ातिर दुनिया छोड़ो,

वो ही चाक जिगर करते हैं, वो ही दिल तोड़ा करते हैं॥


पागल दीवाना कह देना कोई बड़ा इल्ज़ाम नहीं,

 ये जगवाले दिलवालों को जाने क्या क्या कहते हैं॥


तड़पाया तन्हा रातों में, जिसने बेगाना समझा,

उसके ख़ातिर ही “सूरज”, दीवाने आहें भरते हैं॥


                                 डॉ॰ सूर्या बाली “सूरज”

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